Sunday, March 13, 2011

दिल का ये अफ़साना......

दिल का ये अफ़साना जी.
सबको नहीं सुनाना जी.


तन्हाई में गूंजा करता
है, यादों का गाना जी.


कच्चा आँगन, पक्का पीपल,
कहाँ वो दादा-नाना जी.


बचपन में चोटी खिंची थी,
दिल उसका हर्ज़ाना जी.


सुबह-सुबह गर शाम मिले
तो, आशीषें ले जाना जी.


अच्छा है जो अखियाँ भीगीं,
नमी में उगता दाना जी.


आँसू बहते दुःख में, सुख में,
अच्छा ताना- बाना जी.


: राकेश जाज्वल्य. १२.०३.२०११.
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Thursday, March 10, 2011

फूंक.........(त्रिवेणी)

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हौले से नमी वाली इक फूंक मारें.
चाँद की आखों से चलो धूल झारें.

अब चेहरा तुम्हारा कुछ साफ़ नज़र आता है.

: राकेश जाज्वल्य. 10.03.2011
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Friday, February 25, 2011

सफ़र....

 
मैंने माना मेरी जानां, कि चलते रहना है बहुत मुश्किल,
पर जो मंज़िल पर हो तुम, तो कदम सुनते नहीं मेरी.

सात जनमों की ही तो बात है, इक सफ़र मैं भी पूरा कर लूँ.

: राकेश जाज्वल्य
२५.०२.२०११.
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Tuesday, December 14, 2010

दिल इक ऐसा गुल्लक...



किसने जोड़े हैं गिन गिन के.
तस्वीरों के पीछे तिनके.

 और भला क्या है आँखों में,
कुछ उम्मीदें अच्छे दिन के.

 जो सौदा आँखों का, उसमे
कहाँ बही-खाते धन-ऋण के.

 दादी और नानी की कहानी,
बुद्धू-बक्सा ले गया  छीन  के.

 अपने हिस्से के ही दाने,
चिड़िया ले जाती है  बीन के.

 वो अक्सर भटके मिलते हैं,
दुनिया पीछे चलती जिनके.

 अब ना दरख्तों तले गाँव में,
गूंजा करते बोल ता-धिन के.

 दिल इक ऐसा गुल्लक जिसमे,
सिक्के जमा बीते पल-छिन के.

: राकेश जाज्वल्य. १४.१२.१०
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Friday, November 26, 2010

तेरी याद रजाई है....

मेरे लबों पर आई है,
तुझ सी एक रुबाई है।

जब से तेरा साथ हुआ है,
गुस्से में तन्हाई है।

मौसम सर्द अकेलेपन का,
तेरी याद रजाई है।

नर्म, मुलायम, भीनी-भीनी,
सांसें हैं, पुरवाई है।

करवट बदली है मौसम ने,
या तेरी अंगडाई है।

कुछ है दुनिया की मज़बूरी,
कुछ दिल भी हरजाई है।

रिश्ते ठन्डे हुए बर्फ से,
किसने आग लगाईं है।

धुली-धुली लगती है आँखें,
तू फिर रो कर आई है।

: राकेश जाज्वल्य २६.११.२०१०
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Sunday, November 21, 2010

तू लाख़ कहे है पागलपन ....

तू जो है तो मै हूँ, तेरी वजह से मेरा होना है।
तेरे लबों पे पाना है खुद को, तेरी बाँहों में खोना है।

मै हूँ इक बादल आवारा, तेरा प्यार समंदर गहरा है।
मै बरसूं कहीं, इक रोज मुझे, तेरी लहरों में खोना है।

दिखता है मुझे हर शख्स में तू, तेरी याद में वो गहराई है।
मेरी आँखों पर मेरा बस ही नहीं, ये कैसा जादू - टोना है।

तू लाख़ कहे है पागलपन, मंजूर मुझे झिड़की तेरी,
तेरी चाहत है गर राधा- सी, मेरा इश्क भी किशन सलोना है।

: राकेश जाज्वल्य .
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हवाओं में बारिश की बूंद................

हवाओं में बारिश की बूंद गुनगुनाती है,
भीगे पत्तों सी तुम्हारी याद आती है.

बरसात में कहीं से घूम कर लौटो,
गीली मिटटी भी घर के भीतर आती है.

मिल भी जाते हैं ज़िस्मों से जिस्में,
और दूरियां दिलों की रह भी जाती है.

जिसमे दामन पर कोई दाग ना लगे,
अक्सर वो मोहब्बत बेवज़ह कहलाती है.

बनाता है बार- बार वो रेत में घरोंदें,
हर बार  आँखों में उम्मीद झिलमिलाती है.

दोस्तों मेरे घर के उसे इशारे ना करो,
नदी क्या समंदर का पता पूछ कर जाती है.
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: राकेश जाज्वल्य