यहाँ मेरी इक ग़ज़ल - तुमने जिनको छू लिया - को स्थान मिला है ..... उम्मीद है यह ग़ज़ल आपको भी पसंद आएगी.
यहाँ हैं.. मेरी ग़ज़लें और कवितायेँ...... कितनी भी कोशिश करें, चाहें..पी लें..... सूखती नहीं मगर..खारे पानी की झीलें.
Saturday, June 18, 2011
क्यूँ कर तन्हा रातें करना...
क्यूँ कर तन्हा रातें करना.
खुद से उसकी बातें करना.
सच्चे होकर भी क्यूँ हारें,
सीखें हम भी घातें करना.
अपनों की आँखों में, सुख के
सपनों की सौगातें करना.
जब आँखों में उमड़ें बादल,
गज़लों की बरसातें करना.
प्यार में दोनों तरफ वही है,
क्या शह देना, मातें करना.
क्या दुनिया, क्या दुनियादारी,
खुद से भी मुलाकातें करना.
: राकेश जाज्वल्य. ०६.०६.२०११.
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खुद से उसकी बातें करना.
सच्चे होकर भी क्यूँ हारें,
सीखें हम भी घातें करना.
अपनों की आँखों में, सुख के
सपनों की सौगातें करना.
जब आँखों में उमड़ें बादल,
गज़लों की बरसातें करना.
प्यार में दोनों तरफ वही है,
क्या शह देना, मातें करना.
क्या दुनिया, क्या दुनियादारी,
खुद से भी मुलाकातें करना.
: राकेश जाज्वल्य. ०६.०६.२०११.
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Tuesday, May 10, 2011
मुहब्बत.....
काँच पे साँस के भाप के जैसी.
मुहब्बत मीठी-ताप के जैसी.
फिर से सिरहाने लौट कर आई,
रात के आधे ख़्वाब के जैसी.
सूनी आँखों में गुमशुदा चेहरा,
या कि..चटके गुलाब के जैसी.
खुली पलकों की अधखुली बातें,
गीले अधरों के कांप के जैसी.
मन के गुम-सुम, उदास कोने में,
किसी ईश्वर के जाप के जैसी.
कांच पे साँस के भाप के जैसी.
मुहब्बत मीठी-ताप के जैसी.
: राकेश जाज्वल्य. १०.०५.२०११.
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मुहब्बत मीठी-ताप के जैसी.
फिर से सिरहाने लौट कर आई,
रात के आधे ख़्वाब के जैसी.
सूनी आँखों में गुमशुदा चेहरा,
या कि..चटके गुलाब के जैसी.
खुली पलकों की अधखुली बातें,
गीले अधरों के कांप के जैसी.
मन के गुम-सुम, उदास कोने में,
किसी ईश्वर के जाप के जैसी.
कांच पे साँस के भाप के जैसी.
मुहब्बत मीठी-ताप के जैसी.
: राकेश जाज्वल्य. १०.०५.२०११.
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Tuesday, May 3, 2011
Friday, April 22, 2011
जलन ...
कह रही थी रात सुबह से जो सुबह-सुबह,
तुम्हारी ही खुश्बुओं की कुछ बात थी शायद.
....पूरा दिन हर-श्रृंगार लाल-पीला होता रहा.
: राकेश.
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तुम्हारी ही खुश्बुओं की कुछ बात थी शायद.
....पूरा दिन हर-श्रृंगार लाल-पीला होता रहा.
: राकेश.
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Friday, April 8, 2011
ये साली ज़िन्दगी....
जितनी दिखती है,
उतनी खुबसूरत नहीं है.
भावनाओं में बहने की
ज़रूरत नहीं है.
ज़िन्दगी है ही ऐसी.
इसकी ऐसी की तैसी.
दिल की भी कभी सुन ले,
ऐसी सोच नहीं है.
बड़ी कड़क है साली,
ज़रा भी लोच नहीं है.
हरदम रहती ऐठीं,
इसकी ऐसी की तैसी.
बड़ी ही ना-शुक्री है,
पास नहीं आती,
सुविधाओं के कीचड़ में,
पड़ी रहे अलसाती.
मोटी-काली-भैसीं.
इसकी ऐसी की तैसी.
इसकी मीठी, रसभरी,
बातों पर हँसना नहीं.
करना हाथों पर यकीं,
लकीरों में फंसना नहीं.
झूठी प्रेमिका जैसी.
इसकी ऐसी की तैसी.
: राकेश ०९.०४.२०११.
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उतनी खुबसूरत नहीं है.
भावनाओं में बहने की
ज़रूरत नहीं है.
ज़िन्दगी है ही ऐसी.
इसकी ऐसी की तैसी.
दिल की भी कभी सुन ले,
ऐसी सोच नहीं है.
बड़ी कड़क है साली,
ज़रा भी लोच नहीं है.
हरदम रहती ऐठीं,
इसकी ऐसी की तैसी.
बड़ी ही ना-शुक्री है,
पास नहीं आती,
सुविधाओं के कीचड़ में,
पड़ी रहे अलसाती.
मोटी-काली-भैसीं.
इसकी ऐसी की तैसी.
इसकी मीठी, रसभरी,
बातों पर हँसना नहीं.
करना हाथों पर यकीं,
लकीरों में फंसना नहीं.
झूठी प्रेमिका जैसी.
इसकी ऐसी की तैसी.
: राकेश ०९.०४.२०११.
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Monday, April 4, 2011
खूबसूरत चिठिया...
राशि और आशि
दोनों नन्ही परियों के लिए...
***************
प्यार में लिखी,
खूबसूरत चिठिया है.
आँगन में दौड़ती-खेलती,
नन्ही-सी बिटिया है.
कभी वो मेरी दादी अम्माँ,
कभी वो मेरी नानी है.
उसकी सपनीली आँखों में,
मेरी ही कहानी है.
अक्सर मेरी डांटें
भूल जाती है.
हँस कर बांहों में
झूल जाती है.
स्कुल, घर,
जहाँ की बातें हैं.
उसकी नींदें हैं,
मेरे काँधें हैं.
उसका चेहरा
मेरे हर्ष में.
वो मेरे दिन,
महीने वर्ष में.
इतने निश्छल,
प्यारे प्यार के लिए.
ईश्वर तेरा शुक्रिया,
इस उपहार के लिए.
: राकेश. ०४.०४.२०११.
**************
दोनों नन्ही परियों के लिए...
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प्यार में लिखी,
खूबसूरत चिठिया है.
आँगन में दौड़ती-खेलती,
नन्ही-सी बिटिया है.
कभी वो मेरी दादी अम्माँ,
कभी वो मेरी नानी है.
उसकी सपनीली आँखों में,
मेरी ही कहानी है.
अक्सर मेरी डांटें
भूल जाती है.
हँस कर बांहों में
झूल जाती है.
स्कुल, घर,
जहाँ की बातें हैं.
उसकी नींदें हैं,
मेरे काँधें हैं.
उसका चेहरा
मेरे हर्ष में.
वो मेरे दिन,
महीने वर्ष में.
इतने निश्छल,
प्यारे प्यार के लिए.
ईश्वर तेरा शुक्रिया,
इस उपहार के लिए.
: राकेश. ०४.०४.२०११.
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