Thursday, June 30, 2011

जंग-लगे से दिन लगते हैं...

अक्सर तेरे बिन लगते हैं.
जंग - लगे से दिन लगते हैं.

प्रेम की कुंजी बिन जीवन के,
सरल सवाल कठिन लगते हैं.

 जब से पोंछा है आखों को,
गीले से पल - छिन लगते हैं.

 दिल की बातें कहनी हो तो,
बुद्धू सारे प्रवीण लगते हैं.

दिल के पन्नो पर यादों के,
तीखे - नुकीले पिन लगते हैं.

* राकेश जाज्वल्य. ३०.०६.२०११.
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Saturday, June 18, 2011

तुमने जिनको छू लिया -

यहाँ  मेरी इक ग़ज़ल - तुमने जिनको छू लिया - को स्थान मिला है ..... उम्मीद है यह ग़ज़ल आपको भी पसंद आएगी.

http://urvija.parikalpnaa.com/2011/05/blog-post_21.html#comments

क्यूँ कर तन्हा रातें करना...

क्यूँ कर तन्हा रातें करना.
खुद से उसकी बातें करना.

सच्चे होकर भी क्यूँ हारें,
सीखें हम भी घातें करना.

अपनों की आँखों में, सुख के
सपनों की सौगातें करना.

जब आँखों में उमड़ें बादल,
गज़लों की बरसातें करना.

प्यार में दोनों तरफ वही है,
क्या शह देना, मातें करना.

क्या दुनिया, क्या दुनियादारी,
खुद से भी मुलाकातें करना.

: राकेश जाज्वल्य. ०६.०६.२०११.
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Tuesday, May 10, 2011

मुहब्बत.....

काँच पे साँस के भाप के जैसी.
मुहब्बत मीठी-ताप के जैसी.



फिर से सिरहाने लौट कर आई,
रात के आधे ख़्वाब के जैसी.


सूनी आँखों में गुमशुदा चेहरा,
या कि..चटके गुलाब के जैसी.


खुली पलकों की अधखुली बातें,
गीले अधरों के कांप के जैसी.


मन के गुम-सुम, उदास कोने में,
किसी ईश्वर के जाप के जैसी.


कांच पे साँस के भाप के जैसी.
मुहब्बत मीठी-ताप के जैसी.


: राकेश जाज्वल्य. १०.०५.२०११.
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Friday, April 22, 2011

जलन ...

कह रही थी रात सुबह से जो सुबह-सुबह,
तुम्हारी ही खुश्बुओं की कुछ बात थी शायद.

....पूरा दिन हर-श्रृंगार लाल-पीला होता रहा.


: राकेश.
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Friday, April 8, 2011

ये साली ज़िन्दगी....

जितनी दिखती है,
उतनी खुबसूरत नहीं है.
भावनाओं में बहने की
ज़रूरत नहीं है.

ज़िन्दगी है ही ऐसी.
इसकी ऐसी की तैसी.


दिल की भी कभी सुन ले,
ऐसी सोच नहीं है.
बड़ी कड़क है साली,
ज़रा भी लोच नहीं है.

हरदम रहती ऐठीं,
इसकी ऐसी की तैसी.



बड़ी ही ना-शुक्री है,
पास नहीं आती,
सुविधाओं के कीचड़ में,
पड़ी रहे अलसाती.

मोटी-काली-भैसीं.
इसकी ऐसी की तैसी.


इसकी मीठी, रसभरी,
बातों पर हँसना नहीं.
करना हाथों पर यकीं,
लकीरों में फंसना नहीं.

झूठी प्रेमिका जैसी.
इसकी ऐसी की तैसी.


: राकेश ०९.०४.२०११.
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