
दो त्रिवेणियाँ - तीन पंक्तियों की छोटी सी रचना- प्रस्तुत है,
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१ बरसात .....
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१ बरसात .....
यूँ तुम्हारी मुहब्बत को तरसा हूँ अभी.
बनकर ओस निगाहों से बरसा हूँ अभी.
चेहरा तुम्हारा भी कुछ भीगा-भीगा लगता है.
बनकर ओस निगाहों से बरसा हूँ अभी.
चेहरा तुम्हारा भी कुछ भीगा-भीगा लगता है.
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2. घाल -मेल......
खुद को दी आवाज़, कभी जब मैंने तुम्हे पुकारा,
तेरा चेहरा आया नज़र, जब मैंने खुद को निहारा.
मुहब्बत का खेल है....बड़ा निराला घाल-मेल है....
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: राकेश जाज्वल्य.