Friday, October 19, 2012

मेरे बटुए में तुमको बस मिलेंगें नोट खुशियों के,
मैं सब चिल्हर उदासी के अलग गुल्लक में रखता हूँ.

: राकेश जाज्वल्य. 12.10.2012


6 comments:

Anju (Anu) Chaudhary said...

क्या बात है और वही ...चिल्लर ...कभी कभी किसी बच्चे के काम आती है जो उसके उदास चहरे पर खुशी बिखेर देती है :)))

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...

रश्मि प्रभा... said...

:)उदासी के चिल्लरों से पहचान है

रश्मि प्रभा... said...

http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/10/blog-post_20.html

Rajesh Kumari said...

वाह कम शब्दों में बहुत शानदार अभिव्यक्ति

Reena Maurya said...


बहुत खूब....
बहुत बढियां....
:-)